Category of Bare Act Name of the Act Year of Promulgation
Criminal Laws Indian Penal Code 1860
Act Number Enactment Date Chapter Number
45 06.10.1860 8
Chapter Title Sub-Chapter Legislated by
Of Offence Against The Public Tranquillity - Parliament of India

Whoever knowingly joins or continues in any assembly of five or more persons likely to cause a disturbance of the public peace, after such assembly has been lawfully commanded to disperse, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine, or with both.

Offence Description Punishment provided Cognizable/Non-Cognizable
Knowingly joining or continuing in any assembly of five or more persons after it has been commanded to disperse. Imprisonment for 6 months, or fine, or both. Bailable
Bailable/Non-Bailable Trial Court Details Compoundable/Non-Compoundable
Bailable Any Magistrate Non-Compoundable
Compoundable by Whom Concerned Ministry Concerned Department
Non-Compoundable Ministry of Home Affairs Department of Internal Security

भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के अनुसार,

जो भी कोई व्यक्ति पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जनसमूह जिससे सार्वजनिक शांति में विघ्न कारित होना सम्भाव्य हो, जबकि ऐसे सभी जनसमूहों को बिखर जाने का समादेश विधिपूर्वक दे दिया गया हो में जानबूझकर शामिल हो या बना रहे, को किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा

लागू अपराध
पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जनसमूह जिसे बिखर जाने का समादेश दे दिया गया हो में जानबूझकर शामिल होना या बने रहना
सजा - छह महीने कारावास या जुर्माना या दोनों
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायधीश द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
 

भारतीय दंड संहिता की धारा 151

अक्सर ही यह सुना जाता है, कि धारा 151, के मामले में पुलिस ने कुछ आरोपियों को पकड़ लिया है, या कुछ लोगों को जेल में बंद कर दिया है। लेकिन सबसे पहले तो यह जानना बहुत ही जरुरी है, कि भारतीय दंड संहिता की धारा 151, का अर्थ क्या होता है। इस धारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ऐसी किसी सभा या किसी ऐसी गैंग में शामिल होने की इच्छा रखता है, या पहले से ही शामिल होता है, जिसमें पांच या उससे अधिक लोग शामिल हों और जिनका मुख्यतया उद्देश्य समाज में विवाद उत्पन्न करना होता है, तो ऐसे सभी अपराधी भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के अनुसार दंड के भागीदार होते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 151 इस संहिता को प्रदान किया गया एक निवारणात्मक उपहार है, जो संहिता को समाज में विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदान किया गया है।

समाज में सही ढंग से न्याय व्यवस्था और अनुशासन बनाने के लिए कानून के सभी प्रक्रियात्मक यंत्र के प्रत्येक कलपुर्जे का कुशलतापूर्वक कार्य करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा यह उस समाज के हित के लिए हानिकारक भी हो सकता है, जिस समाज के हित के लिए ही ये कानून बनाए जाते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 151 के अनुसार उन सभी अपराधियों को गिरफ्तार करके कानून में वर्णित प्रावधानों के अनुसार सजा दी जाती है, जिससे कि वे भविष्य में कभी भी ऐसी किसी गैंग में न तो शामिल हों और न ही किसी को शामिल होने के लिए प्रेरित करें। भारतीय दंड संहिता की धारा 141 में गैरकानूनी जन सभा के बारे में वर्णन किया गया है, जिसके अनुसार पांच या पांच से अधिक लोगो का समूह जिनमें से सभी का उद्देश्य एक ही हो, और जो लोग समाज में विकार उत्पन्न करने का प्रयत्न करते रहते हों, या लड़ाई दंगों के कामों सबसे आगे रहते हों।
 

धारा 151 के अनुसार गिरफ़्तारी​ की प्रक्रिया

इस धारा का मुख्य उद्देश्य उन सभी लोगों को सजा दिलवाने का होता है, जो समाज में अशांति फ़ैलाने का कार्य करते रहते हैं, जब किसी समाज में किसी गैर क़ानूनी जन सभा द्वारा कोई अपराध को अंजाम दिया जाता है, जिसमें सभी अपराधियों का एक जैसा उद्देश्य हो, तो ऐसे अपराधियों को पुलिस के अधिकारी प्रथम सूचना रिपोर्ट होने के बाद गिरफ्तार कर सकते हैं, और यदि प्रथम सूचना रिपोर्ट नहीं की गयी है, और पुलिस को अपराध के बारे में कहीं और से कोई जानकारी प्राप्त होती है, तो ऐसी स्तिथि में पुलिस अधिकारी न्यायालय से उन आरोपियों के खिलाफ गिरफ़्तारी का वारंट बनवा सकते हैं, जिसके आधार पर उन सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सकता है। किन्तु गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को 24, घंटे के भीतर ही न्यायालय में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य होता है। यह एक अपराधी को भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार में अनुच्छेद 22 में दिया गया अधिकार है, अगर कोई पुलिस का अधिकारी ऐसा नहीं करता है, तो उस अधिकारी के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
 

धारा 151 के अंतर्गत सजा और जमानत का प्रावधान

सामान्यतः धारा 151 के अनुसार जहाँ कोई व्यक्ति कोई ऐसे समूह में शामिल होता है, जिसमें पांच या पांच से अधिक लोग जुड़े हुए हों, और जिनका मुख्य उद्देश्य जन शांति को भंग करना होता है। जब कोई गैर क़ानूनी जन सभा किसी समाज के लोगों में अशांति फ़ैलाने की कोशिश करती है, तो वहाँ की पुलिस ऐसे सभी अपराधियों को जो किसी भी प्रकार से उस गैर क़ानूनी जन सभा से जुड़े हुए हैं, तो ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 151, के अनुसार कारावास की सजा का प्रावधान दिया गया है, और जिसकी समय सीमा को 6 बर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और कारावास के साथ ही आर्थिक दंड का प्रावधान भी दिया गया है, यह आर्थिक दंड न्यायालय अपने विवेक से और अपराधी की हैसियत और उसके जुर्म की गहराई को देखकर निश्चित करती है। इस धारा के अंतर्गत आने वाले आरोपी को जमानत देने का भी प्रावधान दिया गया है, क्योंकि यह बहुत अधिक संगीन अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, जिससे इस धारा के मामले में जमानत मिलने के अवसर और अधिक बढ़ जाते हैं। एक व्यक्ति जमानत लेने के लिए जमानत के सभी चरणों का पालन करते हुए अपनी जमानत प्राप्त कर सकता है।
 

धारा 151 के आरोपी को एक वकील की आवश्यकता क्यों होती है?

आमतौर पर भारतीय दंड संहिता के सभी मामलों से निपटने के लिए ही वकील की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस संहिता में केवल आपराधिक कृत्यों के प्रावधानों और उनकी सजा का वर्गीकरण किया गया है। एक वकील ही उचित रूप से धारा 151, के अपराध से निपटने के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है, क्योंकि वकील को ऐसे मामलों से निपटने का अनुभव होता है, और उसे इस बात की जानकारी होती है, कि किस प्रकार से इस मामले के आरोपी की मदद की जाये। लेकिन इन मामलों में ध्यान देने की बात यह होती है, कि जिस वकील को हम धारा 151 के मामले से सुलझने के लिए नियुक्त कर रहे हैं, वह अपने क्षेत्र में निपुण वकील होना चाहिए, और उस वकील को इस प्रकार के मामलों से सुलझने का काफी अच्छा अनुभव हो, जिससे आपके केस को जीतने के अवसर और भी बढ़ सकते हैं।

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